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भारत और साउथ अफ्रीका की महिला टीमों के बीच विशाखापत्तनम में खेला गया रोमांचक वनडे मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों को आखिरी ओवर तक बांधे रखा। यह मैच एक समय भारत के पक्ष में पूरी तरह झुका हुआ लग रहा था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की ऑलराउंडर नदिनी डी क्लर्क ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया और टीम को शानदार जीत दिला दी।
भारत की कोशिश थी कि वह इस मुकाबले को जीतकर सीरीज़ में अपनी जीत की हैट्रिक पूरी करे, लेकिन किस्मत और क्लर्क की तूफानी पारी ने कहानी ही बदल दी। आइए जानते हैं इस मुकाबले की पूरी कहानी —
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत का संघर्षपूर्ण प्रदर्शन
टॉस हारकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। ओपनिंग जोड़ी स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ने अच्छी शुरुआत दी और अर्धशतकीय साझेदारी कर ठोस नींव रखी। भारत ने शुरुआती 10 ओवर में बिना विकेट खोए तेज शुरुआत की, लेकिन 83 के स्कोर पर मंधाना के आउट होने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ा गई।
मंधाना ने 23 रन बनाए, और उनके आउट होते ही भारतीय मध्यक्रम जैसे बिखर गया। हरलीन देओल, जेमिमा रोड्रिग्स, और कप्तान हरमनप्रीत कौर जल्द ही पवेलियन लौट गईं। सिर्फ 9 रन के अंदर भारत ने तीन बड़े विकेट गंवा दिए। 102 के स्कोर तक पहुंचते-पहुंचते टीम अपने छह विकेट खो चुकी थी।
ऋचा घोष बनीं भारत की दीवार
जहां एक तरफ विकेट गिर रहे थे, वहीं विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष ने टीम को संभाला। पहले उन्होंने अमनजोत कौर के साथ साझेदारी की, और फिर स्नेह राणा के साथ 88 रनों की शानदार साझेदारी कर भारत को मुकाबले में वापस लाया।
ऋचा ने 94 रन की पारी खेली जिसमें चौकों और छक्कों की बारिश रही। वह अपने करियर का शतक पूरा करने से सिर्फ छह रन दूर रह गईं, लेकिन उनकी पारी ने भारत को 251 रनों का सम्मानजनक स्कोर दिलाया।
ऋचा घोष की यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी क्योंकि जब पूरी टीम संघर्ष कर रही थी, तब उन्होंने न सिर्फ रन बनाए बल्कि बल्लेबाजी के तरीके से टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।
साउथ अफ्रीका की शुरुआती लड़खड़ाहट
252 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीकी टीम की शुरुआत खराब रही। तीसरे ओवर में ही तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने ताजमिन ब्रिट्स को अपनी ही गेंद पर शानदार कैच पकड़कर पवेलियन भेज दिया।
थोड़ी देर बाद अमनजोत कौर ने सुने लुस को आउट कर भारत को दूसरा विकेट दिलाया। शुरुआती छह ओवर में साउथ अफ्रीका का स्कोर सिर्फ 20 रन पर दो विकेट था।
टीम पर दबाव बढ़ता जा रहा था, लेकिन कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट ने डटकर मोर्चा संभाला। उन्होंने पहले मारिजाने कैप के साथ साझेदारी की और फिर क्लोई ट्रायॉन के साथ मिलकर पारी को स्थिर किया।
लौरा वोल्वार्ड्ट की जुझारू पारी
कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट का प्रदर्शन इस मैच में बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने 111 गेंदों पर 70 रन की पारी खेली और कई मौकों पर टीम को संकट से बाहर निकाला।
उनकी यह पारी धैर्य और क्लास का उदाहरण थी। जब दूसरे छोर से लगातार विकेट गिर रहे थे, तब लौरा ने संयम नहीं खोया। लेकिन आखिरकार क्रांति गौड़ ने उन्हें क्लीन बोल्ड कर भारत को बड़ा ब्रेकथ्रू दिलाया।
लौरा के आउट होते ही साउथ अफ्रीका की उम्मीदें धुंधली लगने लगीं। स्कोरबोर्ड पर सात विकेट गिर चुके थे और टीम को अब भी 20 से ज्यादा रन चाहिए थे।
नदिनी डी क्लर्क ने पलटा मैच का पासा
यहीं से शुरू हुआ असली ड्रामा। मैदान पर मौजूद थीं नदिनी डी क्लर्क, जिन्होंने भारत के जबड़े से मैच छीन लिया।
डी क्लर्क ने जब क्रीज पर कदम रखा, तब साउथ अफ्रीका मुश्किल में था। लेकिन उन्होंने पहले संभलकर शुरुआत की और फिर आखिरी ओवरों में तूफानी अंदाज दिखाया।
47वें ओवर में डी क्लर्क ने मैच का रुख ही पलट दिया। इस ओवर में उन्होंने लगातार दो छक्के और एक चौका जड़ते हुए 18 रन बटोरे। इस ओवर ने भारत की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
अंततः, नदिनी डी क्लर्क ने नाबाद 84 रन बनाए, जिसमें 5 छक्के और कई धमाकेदार चौके शामिल थे। उनकी यह पारी साउथ अफ्रीकी जीत का आधार बनी।
भारत की गेंदबाजी – शुरुआत शानदार, लेकिन अंत में चूकी लय
भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। क्रांति गौड़, अमनजोत कौर और स्नेह राणा ने साउथ अफ्रीका को दबाव में रखा।
लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, भारतीय गेंदबाजों की लाइन और लेंथ बिगड़ती चली गई। खासकर आखिरी पांच ओवरों में गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे।
साउथ अफ्रीका ने 48.5 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला तीन विकेट से जीत लिया।
मैच के टर्निंग पॉइंट्स
- ऋचा घोष की 94 रनों की पारी – भारत को वापसी कराई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
- लौरा वोल्वार्ड्ट का 70 रन का योगदान – साउथ अफ्रीका की पारी को स्थिर किया।
- डी क्लर्क का 47वां ओवर – दो छक्कों और एक चौके से मैच का रुख पलट दिया।
- भारतीय गेंदबाजी की ढिलाई – आखिरी ओवरों में रन लीक हुए जिससे जीत हाथ से निकल गई।
मैच के बाद के बयान और माहौल
मुकाबले के बाद भारतीय खेमे में निराशा साफ झलक रही थी। टीम ने शानदार शुरुआत के बावजूद जीत हाथ से गंवा दी। वहीं, साउथ अफ्रीकी खिलाड़ियों ने डी क्लर्क की जमकर तारीफ की।
डी क्लर्क को उनकी 84 रनों की नाबाद पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने कहा –
“मैंने बस यह सोचा कि मैच को अंत तक लेकर जाऊं। मुझे पता था कि अगर मैं क्रीज पर रहूंगी तो हम जीत सकते हैं।”
भारत की ओर से ऋचा घोष ने कहा कि टीम को डेथ ओवरों की गेंदबाजी पर और मेहनत करनी होगी।
भारत के लिए सबक
- मध्यक्रम की अस्थिरता – एक बार फिर भारत के मिडिल ऑर्डर ने निराश किया।
- डेथ ओवर गेंदबाजी – आखिरी 4 ओवरों में 40 रन देना मैच गंवाने का बड़ा कारण बना।
- पार्टनरशिप की कमी – ऋचा को छोड़ कोई बल्लेबाज लंबा नहीं टिक पाया।
निष्कर्ष
यह मुकाबला महिला क्रिकेट में उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का उदाहरण रहा। भारत ने शानदार शुरुआत और बेहतरीन व्यक्तिगत प्रदर्शन किए, लेकिन साउथ अफ्रीका की जुझारू टीम ने हार नहीं मानी।
नदिनी डी क्लर्क की पारी ने दिखाया कि क्रिकेट तब तक खत्म नहीं होता जब तक आखिरी गेंद नहीं फेंकी जाती।
भारत ने इस मैच से कई सबक सीखे — खासकर दबाव के पलों में संयम बनाए रखना और डेथ ओवरों की रणनीति पर काम करना।
हालांकि, टीम इंडिया ने अपनी फाइटिंग स्पिरिट से फिर साबित किया कि वह कभी हार नहीं मानती। अगला मैच निश्चित रूप से और भी रोमांचक होगा, क्योंकि दोनों टीमें अब सीरीज़ में बढ़त लेने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।

